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१. परिचय:करणी माता राजस्थान की एक प्रसिद्ध लोकदेवी हैं, जिन्हें माता दुर्गा का अवतार माना जाता है। उनका प्रमुख मंदिर देशनोक (Deshnok) में स्थित है, जो बीकानेर से लगभग 30 किलोमीटर दूर है। यह मंदिर “चूहों वाला मंदिर” (Temple of Rats) के नाम से भी प्रसिद्ध है।
२. जन्म और जीवन:करणी माता का जन्म लगभग 1387 ईस्वी में सुवाप गाँव, जिला जोधपुर (राजस्थान) में हुआ था।उनका असली नाम रिड़ु बाई था और वे चरन जाति से थीं।उनका विवाह देपजी चारण से हुआ, लेकिन बाद में उन्होंने सांसारिक जीवन त्यागकर ईश्वर की भक्ति में जीवन व्यतीत किया।वे अपनी अलौकिक शक्तियों और आशीर्वाद के लिए प्रसिद्ध थीं।
३. चूहों वाला मंदिर:देशनोक का करणी माता मंदिर चूहों के कारण प्रसिद्ध है।यहाँ लगभग 25,000 से अधिक काले चूहे रहते हैं, जिन्हें “काबा” कहा जाता है और पवित्र आत्माओं का प्रतीक माना जाता है।इन चूहों को खाना खिलाना शुभ माना जाता है।अगर किसी को सफेद चूहा दिखाई दे जाए तो उसे बहुत शुभ संकेत माना जाता है।
४. मंदिर का निर्माण:यह मंदिर महाराजा गंगा सिंह (बीकानेर रियासत) ने 20वीं सदी में बनवाया था।मंदिर की वास्तुकला अत्यंत सुंदर है — इसमें संगमरमर के द्वार, चाँदी की जालीदार दरवाज़े और सुंदर नक्काशीदार दीवारें हैं।
५. धार्मिक महत्व:करणी माता को शक्ति स्वरूपा, मर्यादा की देवी, और रक्षक माता के रूप में पूजा जाता है।राजस्थान के कई राजपूत घराने करणी माता को अपनी कुलदेवी मानते हैं।हर वर्ष नवरात्रि के अवसर पर यहाँ बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं६. करणी माता से जुड़ी मान्यता:कहा जाता है कि करणी माता ने अपने परिवार के किसी सदस्य को मृत्यु के बाद पुनः जीवित करने की कोशिश की, लेकिन यमराज ने मना कर दिया। तब माता ने आशीर्वाद दिया कि उनके वंशज मनुष्य नहीं बनेंगे बल्कि चूहों के रूप में जन्म लेंगे और मृत्यु के बाद फिर मानव जन्म पाएँगे। यही कारण है कि यहाँ चूहों की पूजा होती है।
वास्तुकला शैली : इस मंदिर की वास्तुकला में राजस्थानी, मुगल और स्थानीय कलात्मक शैलियों का समन्वय है।
मंदिर का मुख्य द्वार राजस्थानी हवेली शैली में निर्मित है, जिसमें बारीक नक्काशीदार संगमरमर (मार्बल) का प्रयोग किया गया है।
मुगल शैली के मेहराब, पंखुड़ी-आकार की छतरियाँ, और जालीदार खिड़कियाँ इस द्वार को भव्यता प्रदान करती हैं।
मंदिर के अंदर हज़ारों चूहों (काबा) के निवास के अनुसार विशेष डिजाइन किया गया है।
परिसर में छोटे छेद, सुरंगनुमा मार्ग, और अनाज रखने की जगहें बनाईं गई हैं, जिससे चूहों को रहने और घूमने में सुविधा हो।
